Prem Kavita In Hindi

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प्रेम हुआ तो
देखता रहा मैं ख़्वाब
अपने और उसके लिए।
यही ख़्वाब जीवन के
लक्ष्य में कब बदल गए
पता ही नहीं चला।
इन्हें पूरे करने के लिए
जुनून इस कदर बढ़ा
कि निगाह लक्ष्य पर ही रही।
इस बात से ये तो साबित हो गया
कि प्रेम हो या मंज़िल
उसे लग्न से पाया जा सकता है।
ये प्रेम,
लक्ष्य का मार्ग भी हो सकता है,
इस मार्ग से मंज़िल तक जाना
कठिन नहीं लगता,
आखिरकार समझ आया
प्रेम तो प्रेम है।

– दक्ष

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daksh writer

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