नाराज़ खुद से – Naraz Shayari In Hindi

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Naraz Shayari In Hindi

शिकायत औरों से नहीं मुझे हु मैं नाराज खुद से
जाने क्या बात है कि मैं हूं बेजार आज खुद से

मुझे भी तुझसे बेपनाह इश्क है मेरे महबूब
येे और बात मैंने छुपाया है येे राज खुद से

शायर होती नहीं है कोई बनने वाली सैै मियां
फनेे शायरी वाले हो जाते हैं साहीरो मजाज खुद से

चली गई जब से मुझको छोड़कर मेरी माँँ यारों
उठाने पड़ते हैं तब से मुझको मेरे नाज खुद से

मनहशर मत रहो औरो के किसी तिलिस्म की चक्कर में
साहिर हो तुम ही खुद के लिए करो कोई एजाज खुद से

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Tabassum Shaikh

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