एक मुसल्सल ‘बिंदास’ ग़ज़ल – Ghazal In Hindi

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एक मुसल्सल ‘बिंदास’ ग़ज़ल – Ghazal In Hindi

//ग़ज़ल//
2122 2122 222
खुश्बुओं सी वो फ़िज़ा में घुलती है
रंग कितने ज़िन्दगी में भरती है

रंग फूलों से, घटा से लूँ पानी
इस तरह तस्वीर तेरी बनती है

संगमरमर सा बदन अपना लेकर
शाह की मुमताज़ हूँ मैं, कहती है

राज़ कितने भी छुपा ले तू मुझसे
मुस्कुराहट तो बयाँ सब करती है

हैं बला की ख़ूबसूरत दो आँखें
चाँद-तारों की गवाही मिलती है

बात की पर सामने आई न मिली
कुछ कमी ‘बिंदास’ तुझमें लगती है

✍️शैलेन्द्र ‘बिंदास’

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Shailendra Thakur

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