वतन के रखवाले – Deshbhakti Poem In Hindi

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वतन के रखवाले – Deshbhakti Poem In Hindi

वतन के वास्ते जी युं
ये मेरी कामना
मेरे लहू मे तू बहे
कुछ और चाहूँ ना
ना कामना ना वासना
ना हीन भावना
मैं तेरा लाल ,मेरी जान
मैं ना रावण
मैं तेरा लाल
आदर्श तेरे है छिपे
पेशानी पे मेरे तेरा ही
नाम बस रजे
शिकस्त वो नही जो हारु तेरे वास्ते
है हार उसमे जो तेरे लिये नहीँ लड़े।
सुकून ढूँढते खरोचते क्यूँ गलतियां
सिखाती हैं ना ये गिराती है ये गलतियां
बनाती हीरा ये दबाती देख कोयला
तुम्हे बेशक तराश्ती हैं अपनी गलतियां।

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आयुष कुमार कृष्ण

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