लोकतंत्र पर कविता – Democracy Poem In Hindi

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लोकतंत्र पर कविता – Democracy Poem In Hindi

लोकतंत्र के नाम पर ।
लूटों प्रजा को ।।

कूटनीति से कूटों प्रजा को ।
चलाते रहो राजनीतिक द्वंद। ।
निज हितों के संग ।।

गाँधी को गाली दो ।
चरखें को जला दो ।।
बटुकेश्वर से परिचय पूछों।

लोकतंत्र हैं भई!
जिसकी इच्छा देश बेचो।

********************

रोती हैं माँ भारती ।
जब उतारते हो ।
गोडसे की आरती ।।
इन्सान ही थे गाँधी।
भगवान वो नहीं। ।
जो उसने किया वो ।
साधारण काम नहीं। ।

माना कि अमर हैं।
लाल-बाल-पाल ।।
पर वो संत भी थे कमाल ।।

🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳

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Sulekha Jha

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