Dard Shayari In hindi – दर्द का सैलाब

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Dard Shayari In hindi – दर्द का सैलाब

सर्द रातों के हवाओं की असर में
गुनगुनाती धूप खिलती दोपहर में

याद आते स्कूल के वो दिन मुझे जब
रास्ते से फ़िर वही गुज़रा सहर में

चॅनलों पर आज-कल जो भी बताते
झूठ की भरमार होती है ख़बर में

बेतहाशा चाहने के बाद भी क्यों
प्यार दिखता ही नहीं तेरी नज़र में

काश इतना कर सकूं तो कर सकूंगा
हमसफ़र बन के चलूं सब के सफ़र में

उस शहर के सब मकां बंजर पड़े हैं
बच्चे रहते ही नहीं हैं जिस शहर में

जब ख़ुशी पलने लगी आया नहीं फ़िर
दर्द का सैलाब अंकित के जिगर में

अनिकेत सागर

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Aniket Sagar

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