आजादी की राह पर – Azadi Poem In Hindi

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आजादी की राह पर – Azadi Poem In Hindi

अंग्रेजो की जकड़न से
खुद को आजाद कराया हमने,
कितनी मांगो के सिंदूर मिटाकर
कितनी माओं के लाल गवाया हमने।
हर बार लड़ाई लड़कर
हर युद्ध को अंजाम दिया हमने
खुद को साबित करने के खातिर
हंसते हंसते सूली चढ़कर अपनी जान का दान
दिया हमने।
गोरों को भगाने के खातिर
लड़ जाती थी नारी भी जूझकर
बांधकर पीठ में बच्चे को अपने
अपने भारत देश के खातिर
लड़ती थी वह समझ बूझकर

अंजनी पांडेय (साहब)

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Anjani Pandey

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