Zafar Gorakhpuri Shayari Analysis With Review | Shayari Kaise Likhe

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शायरी लिखने वाले सारे Writer’s का आज के ब्लॉग में स्वागत है। इस पोस्ट “Zafar Gorakhpuri Shayari Analysis With Review” में “ज़फ़र गोरखपुरी” साहब की Complete Ghazal का Analysis करने वाले हैं। हर नया शायर अगर इस तरह के analysis को समझता है, तो आप भी मशहूर शायर के जैसे शायरियां लिख पाएंगे। पेश है “ज़फ़र गोरखपुरी शायरी” – 
Zafar gorakhpuri
मतला शे’र
मेरी इक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए,
बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए।
रेत मेरी उम्र मैं बच्चा निराले मेरे खे’ल,
मैं ने दीवारें उठाई हैं गिराने के लिए।
वक़्त होंटों से मिरे वो भी खुरच कर ले गया,
इक तबस्सुम जो था दुनिया को दिखाने के लिए।
छत टपकती थी अगरचे फिर भी आ जाती थी नीं’द,
मैं नए घर में बहुत रोया पुराने के लिए।
आसमाँ ऐसा भी क्या ख़तरा था दिल की आग से,
इतनी बारिश एक शोले को बुझाने के लिए,
देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना,
तजरबे आए थे संजीदा बनाने के लिए।
मक़्ते का शे’र
मैं ‘ज़फ़र’ ता-ज़िंदगी बिकता रहा परदेस में,
अपनी घर-वाली को इक कंगन दिलाने के लिए।
ये ग़ज़ल ज़फ़र गोरखपुरी साहब के द्वारा बहरे रमल मुसमन महज़ूफ़ में लिखी गई है। जिसकी अरकान 2122 2122 2122 212 है। अगर आप इस अरकान पर लिखी किसी भी मशहूर शायर की ग़ज़ल, शायरियां बोलेंगे, तो आपको एक ही लय का अहसास होगा। मैंने आपको इतने shayari और ghazal के analysis करके बताएं है। आपने भी गौर किया होगा कि ज्यादातर ग़ज़लकार, शायर इसी अरकान पर लिखते हैं या लिख चुके हैं।
इस ग़ज़ल में काफ़िया रदीफ़ को समझने के लिए मैंने आपको नीचे लिखकर बताएं हैं-
काफ़िया-रदीफ़
पाने के लिए
ज़माने के लिए
गिराने के लिए
दिखाने के लिए
पुराने के लिए
बुझाने के लिए
बनाने के लिए
दिलाने के लिए
इसमें “के लिए” रदीफ़ हो रहा है, जो बदल नहीं रहा है। बाकी के शब्द पाने, ज़माने, गिराने, दिखाने, पुराने, बुझाने, बनाने और दिलाने काफ़िया शब्द है।
इस ग़ज़ल में आये कुछ खास important words अर्थ के साथ जान लेते हैं। 
उर्दू शब्दों के अर्थ
मसअला – समस्या 
तबस्सुम – मुस्कान
अगरचे – यद्यपि, हालांकि
तजरबे – अनुभव 
संजीदा – गम्भीर, शांत
ज़फ़र – विजय
ता-ज़िंदगी – ज़िंदगी भर या पूरी ज़िंदगी
“ता-ज़िंदगी” इस तरह के शब्दों का use आप भी अपनी ग़ज़ल, शायरी में कर सकते हैं। इस “ता” का अर्थ पूरी या तक हो सकता है। 
जैसे –
ता-उम्र – उम्र भर
ता-क़यामत – क़यामत तक
Conclusion : उम्मीद है Shayari kaise likhe, इस series की ये पोस्ट “Zafar Gorakhpuri Shayari Analysis With Review” आपको समझ आयी होगी। इस पोस्ट से प्रेरित होकर आप जो कुछ भी लिखते हैं कमेंट करके जरूर बताएं।

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